सत्य का मार्ग – धन नहीं, चेतना और ज्ञान
लोगों ने अपने जीवन का अधिकांश समय स्वयं को कंगाल बनाने में बिता दिया। वास्तविक जीवन स्वयं में परिपूर्ण है, और बहुत अधिक ऐश्वर्यवान और समृद्ध है। लेकिन इस दुनिया की गति उल्टी दिशा में है। यहाँ वही माया या इल्युजन है, जिसे लोग अपना समझते हैं और शक्तिशाली मानते हैं, पर वास्तव में यह उनका नहीं है।
"सारी समस्याओं का मूल कारण मानसिक बिमारी है।"
लोगों का मन स्वस्थ नहीं है। वे स्वयं के शत्रु बने हुए हैं। अपनी चेतना और ज्ञान को पहचान न पाने के कारण उन्होंने स्वयं को कैदी बना लिया है। जैसे कोई नाव सागर के मध्य में स्थिर हो गई हो, इसमें सागर का दोष नहीं है। नाव का मालिक अर्थात शरीर, संसार सागर की तरह है, और जीव – चेतना या ज्ञान – उसका वास्तविक स्वामी है।
जब चेतना शरीर से बंध जाती है, तो समस्या, सड़न और मृत्यु दिखाई देती है। परंतु जब ज्ञान या चेतना शरीर की वास्तविक स्वामी है, तब ऐश्वर्य, अमरता और आनंद प्रकट होते हैं।
मार्ग की विशेषताएँ
- यह मार्ग पूर्णतः खाली है, यहाँ कोई संघर्ष या ट्रैफिक नहीं है।
- जो इस मार्ग पर चलते हैं, वे मानसिक रूप से स्वतंत्र और शक्तिशाली होते हैं।
- लोगों को प्रशिक्षण की आवश्यकता है ताकि वे उस मार्ग पर चल सकें जहाँ अभी कोई भी नहीं है।
उदाहरण स्वरूप, मैंने स्वयं लंबा समय ऑनलाइन काम करने और धन कमाने में बिताया, लेकिन धन के लिए भी धन चाहिए। इससे अच्छा, मैं निर्धन ही भला हूँ। मेरे ईश्वर ने जो मुफ्त दिया है, वह पर्याप्त है। मैं स्वयं को दुनिया का अमीर मानता हूँ क्योंकि मेरे पास मानसिक विमारी नहीं है।
आज लोग केवल धन को केंद्र मान कर उसके चारों तरफ चक्कर लगा रहे हैं, जबकि मैं बिना धन के भी अपने स्थान पर स्थित हूँ। यह सत्य बड़ा चौकाने वाला है।
"सच्ची संपन्नता धन में नहीं, बल्कि चेतना, ज्ञान और मानसिक स्वतंत्रता में है।"
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