Fear of Death and Loss: Vairagya Shatakam

वैराग्यशतकम् - श्लोक ९ (मृत्यु-भय एवं जैविक जड़ता)

निवृत्ता भोगेच्छा पुरुषबहुमानोऽपि गलितः
समानाः स्वर्याताः सपदि सुहृदो जीवितसमाः ।
शनैर्यष्ट्युत्थानं घनतिमिररुद्धे च नयने
अहो मूढः कायस्तदपि मरणापायचकितः ॥ ९॥
संस्कृत शब्द विच्छेद / प्रकृति-प्रत्यय अर्थ (Deep Meaning)
निवृत्ता नि + वृत् + क्त (स्त्री.) लौट गई / समाप्त हो गई (Withdrawn)।
स्वर्याताः स्वः (स्वर्ग) + याताः परलोक सिधार गए / मर गए।
यष्टि-उत्थानम् यष्टि (लाठी) + उत्थानम् सहारे (लाठी) से उठना।
घन-तिमिर-रुद्धे घन + तिमिर + रुद्धे गहरे अंधकार (मोतियाबिंद/दृष्टिहीनता) से घिरी हुई।
मरणापाय-चकितः मरण + अपाय + चकितः मृत्यु के संकट से डरा हुआ।

हिन्दी: भोगों की इच्छा समाप्त हो गई, समाज में मिलने वाला मान-सम्मान भी जाता रहा, प्राणों के समान प्यारे मित्र और साथी भी परलोक सिधार गए। अब लाठी के सहारे धीरे-धीरे उठना पड़ता है और आँखें भी गहरे अंधकार से घिर गई हैं (दिखना बंद हो गया है); फिर भी, आश्चर्य है कि यह 'मूढ़ शरीर' मृत्यु के आने की आहट से कांप उठता है!


English: The desire for enjoyment has vanished; the respect once received from people has dwindled; contemporaries and dear friends, who were like life itself, have departed. Rising is now slow and only with the help of a staff, and the eyes are blocked by dense darkness. Alas! This foolish body still shudders at the prospect of death.

1. Social Isolation & Cognitive Decline (समानाः स्वर्याताः): समाजशास्त्र (Sociology) के अनुसार, बुढ़ापे में 'Social Death' शारीरिक मृत्यु से पहले आती है। जब समकालीन मित्र मर जाते हैं, तो मस्तिष्क का 'Belongingness' केंद्र क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे व्यक्ति 'Existential Void' (अस्तित्व के शून्य) का अनुभव करता है।

2. Sensory Deprivation (घनतिमिररुद्धे): 'घन तिमिर' मोतियाबिंद (Cataract) या 'Macular Degeneration' का सटीक वर्णन है। विज्ञान कहता है कि दृष्टि खोने से मस्तिष्क का 'Spatial Orientation' बिगड़ जाता है, जो व्यक्ति में असुरक्षा की भावना को बढ़ाता है।

3. The Amygdala vs Logic (मूढः कायः): यहाँ 'मूढ़' शब्द वैज्ञानिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। तार्किक रूप से (Prefrontal Cortex), व्यक्ति जानता है कि अब जीवन में कुछ शेष नहीं है, लेकिन मस्तिष्क का आदिम हिस्सा (Amygdala) 'Survival Instinct' के कारण मृत्यु से डरता रहता है। यह 'Biological Programming' और 'Reasoning' के बीच का वह संघर्ष है जिसे भर्तृहरि ने एक श्लोक में पिरो दिया है।

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