🙏🙏🙏नमस्ते जी🙏🙏🙏


    *कलयुगाब्द - - ५१२७*

दिनांक - - *०४ जुलाई २०२६* 

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 *सृष्टि संवत्*  - - १,९६,०८,५३,१२७

 *सूर्य*  - - दक्षिणायन  

 *ऋतु* - -  वर्षा 

 *मास*  - - आषाढ़ 

 *पक्ष*  - -  कृष्ण 

🌗 *तिथि* - - चतुर्थी

(१२:३९ बजे तक तत्पश्चात् पञ्चमी)

🪐 *नक्षत्र* - - धनिष्ठा

(१३:४२ बजे तक तत्पश्चात् शतभिषा)

 *दिन*  - - शनिवार 

 *काल / मुहूर्त*  - - प्रातःकाल 

🌅 *सूर्योदय*  - - प्रातः ५:२९ पर (*इन्द्रप्रस्थ - दिल्ली* )

🌞  *सूर्यास्त*  - - सायं १९:२१ पर 

🌘 *चन्द्रोदय* - - २२:१८ पर 

🌒 *चन्द्रास्त*  - - ‌‌०९:०८ पर 


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🚩‼️ओ३म् ‼️🚩


   🔥क्या होते हैं ६ शास्त्र ? ६ शास्त्रों का संक्षिप्त परिचय!!! 

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   हिन्दू समाज ने चार वेदों के बाद ६ शास्त्रों का नाम कई बार सुन रखा है । लेकिन हमारी हिन्दू जनता इनसे अंजान है । तो ये आर्य समाज का दायित्व बनता है कि हिन्दू अपने प्रत्येक धर्मग्रंथ को अच्छे से जाने और समझे । जैसा कि आर्य समाज सदा से इसी प्रयास में रहा है कि हिन्दू अपने मूल वैदिक धर्म को ठीक से जानकर इससे जुड़ जाए और इसलिये समय समय पर आर्य समाज ने अपनी प्रखर लेखनी के द्वारा हिन्दू जनता में चेतना फैलाई है ।


   तो इन ६ शास्त्रों को वेदों के उपांग या दर्शन शास्त्र भी कहा जाता है । हमारे ऋषियों ने वेदों में यत्र तत्र बिखरे सिद्धान्तों को समेटकर इन ६ दर्शनशास्त्रों का निर्माण किया है जिनके आधार पर हम वेदवाणी को ठीक ठीक समझ सकते हैं । ये ६ वैदिक दर्शन आस्तिक दर्शन कहलाते हैं । ये हमारे तर्कशास्त्र हैं जिन्हें पढ़कर हर मनुष्य की बुद्धि खुल जाती है और वह कभी भ्रमित होकर ईश्वर, धर्म, अधर्म, सत्य, असत्य आदि के विषय पर शंका नहीं करता । इन दर्शन शास्त्रों को पढ़कर सभी प्रकार की शंकाओं का समाधान स्वयं ही हो जाता है । ये ६ दर्शन इस प्रकार हैं :-


   (१) न्याय शास्त्र :- इसकी रचना गौतम मुनि ने की है । इस शास्त्र का विषय मुख्यतः तर्क है । चार प्रकार के प्रमाणों के द्वारा मनुष्य अपने आसपास बिछे हुए संसार में से सत्य और असत्य को छाँटकर अलग करके जान पाए इस उद्देश्य से ये दर्शन रचा गया है ।


   (२) वैशेषिक शास्त्र :- इसकी रचना कणाद मुनि ने की है । ये शास्त्र पदार्थ विद्या के बारे में है । ईश्वर ने हमारे लिये संसार के जिन पदार्थों का निर्माण किया है उनके गुण कर्म आदि जानकर उनसे कैसे उपयोग लेना है ? ये इस शास्त्र का विषय है । ( ये भौतिक शास्त्र है )


   (३) सांख्य शास्त्र :- इसकी रचना कपिल मुनि ने की है । इसका मुख्य विषय है प्रकृति के सबसे सूक्ष्म कणों से सृष्टि की उत्पत्ति कैसे होती है ? कैसे सभी पदार्थों में समानता होते हुए विशेषता है ? ये शास्त्र पूर्ण रूप से प्रकृति और आत्मा में भेद बतलाता है ।


   (४) योग शास्त्र :- इसकी रचना पतंजलि मुनि ने की है । इसका मुख्य विषय है आठ मर्यादाओं ( यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधी ) का पालन करते हुए सभी दुखों से छूटते हुए मोक्ष प्राप्त करने की विधि बताना ।


   (५) मीमांसा :- इसकी रचना जैमिनि मुनि ने की है । इसका विषय है कि किस प्रकार के वैदिक कर्मकांड और मर्यादाओं का पालन करने से मनुष्य पूर्ण सुखी हो सकता है और अपने जीवन के लक्ष्य मोक्ष को पा सकता है ?


   (६) वेदान्त ( ब्रह्मसूत्र ) :- इसकी रचना बादरायण वेदव्यास मुनि ने की है । इसका मुख्य विषय है ईश्वर के स्वरूप उसके गुणों का वर्णन करना जिनके जानकर मनुष्य उनके विषय में सभी शंकाओं से निवृत होकर उनकी उपासना में लगे और योगाभ्यास करते हुए उनको प्राप्त करे ।


  ये हमारे ६ वैदिक आस्तिक दर्शन हैं जिनको पढ़कर मनुष्य वेद के मन्तव्य ठीक से समझकर तार्किक होकर अपने मूल धर्म को ठीक से जान सकता है ।


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 🚩‼️आज का वेद मंत्र ‼️🚩


 🔥ओ३म् अपामिदं न्ययनˆ समुद्रस्य निवेशनम्।

अन्याँस्तेऽअस्मत्तपन्तु हेतय: पावकोऽअस्मभ्यं शिवो भव॥ यजुर्वेद १७-७॥


🌷  जिस प्रकार आकाश जलों का निश्चित स्थान है। उसी प्रकार हे ईश्वर, शांति का हमारे घर को निश्चित स्थान बनाओ। हम अपने  घर से उत्तम कर्म करें। हे प्रभु, शांति और सम्मान को हमारे घर लाओ और संकटों को हमारे घर से दूर ले जाओ। 


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      *आज का संकल्प पाठ*

*(सृष्टिसंवत्सर-अयन-ऋतु-मास-पक्ष-तिथि-नक्षत्र-दिवस-मुहूर्त)*     

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*अथ संकल्पपाठ:*।


ओं तत्सत् श्री ब्रह्मणो  द्वितीये प्रहरार्द्धे  वैवश्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे

कलिप्रथमचरणे एको वृन्दः षण्णवति: कोटयोऽष्टौ लक्षाणि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि  सप्तविंशत्यधिकशतसंवत्सरे ,  दक्षिणायने , वर्षर्तौ, आषाढ़मासे, कृष्णपक्षे, *चतुर्थ्याम्* तिथौ, *धनिष्ठा* नक्षत्रे, *शनिवासरे* , प्रातःकाले आर्यावर्तान्तर्गते ..प्रदेशे.... जनपदे...नगरे   (अस्माभिः / मया)  अयं देवयज्ञ: क्रियते ।

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