अर्थशास्त्रम्/अधिकरणम् १/अध्यायः १६ kautilya arthashastra Hindi english explanation 1.16

०१.१६.०१ – उद्धृत मंत्रो दूत-प्रणिधिः

उद्धृत-मन्त्रो दूत-प्रणिधिः।।
हिंदी व्याख्या: यह मंत्र विशेष रूप से दूत को प्रेषित करने के लिए उद्धृत किया गया है।
English Explanation: This mantra is specifically invoked for sending an envoy or messenger.

०१.१६.०२ – अमात्य सम्पदा उपेति

अमात्य-सम्पदाउपेतो निसृष्ट-अर्थः।।
हिंदी व्याख्या: यदि मंत्री के पास पर्याप्त संपत्ति नहीं है, तो वह अर्थ-संपत्ति को निष्कासित कर देता है।
English Explanation: A minister lacking sufficient resources may fail to manage the designated wealth.

०१.१६.०३ – पाद-गुण-हीनः परिमित-अर्थः

पाद-गुण-हीनः परिमित-अर्थः।।
हिंदी व्याख्या: जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों में अक्षम है, उसका अर्थ-संचय सीमित रहता है।
English Explanation: One deficient in basic capabilities will have limited financial or resource gains.

०१.१६.०४ – अर्ध-गुण-हीनः शासन-हरः

अर्ध-गुण-हीनः शासन-हरः।।
हिंदी व्याख्या: जो व्यक्ति आधे गुणों से ही रह जाता है, वह शासन या प्रबंधन में विफल हो जाता है।
English Explanation: One lacking sufficient virtues or skills fails to properly administer or govern.

०१.१६.०५ – यान-वाहन-पुरुष-परिवापः प्रतिष्ठा

सुप्रतिविहित-यान-वाहन-पुरुष-परिवापः प्रतिष्ठेत।।
हिंदी व्याख्या: किसी कार्य में सुप्रतिष्ठित यान, वाहन और व्यक्तियों की व्यवस्था करनी चाहिए।
English Explanation: Proper arrangement of vehicles, carriers, and personnel should be ensured for an operation.

०१.१६.०६ – शासन एवं प्रतिवाक्य

शासनं एवं वाच्यः परः। स वक्ष्यत्येवम्। तस्यैदं प्रतिवाक्यम्। एवं अतिसंधातव्यम्। इत्यधीयानो गच्छेत्।।
हिंदी व्याख्या: शासन के नियम और उसका उत्तर (प्रतिवाक्य) स्पष्ट रूप से बताना चाहिए और उसे ध्यानपूर्वक पालन करना चाहिए।
English Explanation: The rules of governance and their counter-statements should be clearly conveyed and followed meticulously.

०१.१६.०७ – प्रतिसंसर्ग करना

अटव्य्-अन्त-पाल-पुर-राष्ट्र-मुख्यैश्च प्रतिसंसर्गं गच्छेत्।।
हिंदी व्याख्या: वन, नगर, दुर्ग, राज्य और उनके प्रमुखों के साथ संपर्क और संवाद स्थापित करना चाहिए।
English Explanation: One should establish communication and liaison with forests, cities, forts, regions, and their chiefs.

०१.१६.०८ – अनीक-स्थान-युद्ध-प्रतिग्रह-अपसार

अनीक-स्थान-युद्ध-प्रतिग्रह-अपसार-भूमीरात्मनः परस्य चावेक्षेत।।
हिंदी व्याख्या: व्यक्ति को अपनी भूमि और अन्य स्थानों में युद्ध या परित्याग जैसी परिस्थितियों को अपने और दूसरों के दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
English Explanation: One must observe lands, wars, and withdrawals from both personal and others' perspectives.

०१.१६.०९ – दुर्ग-राष्ट्र-प्रमाण

दुर्ग-राष्ट्र-प्रमाणं सार-वृत्ति-गुप्तिच्-छिद्राणि चौपलभेत।।
हिंदी व्याख्या: दुर्ग और राज्य की सीमा, सुरक्षा और गुप्त खामियों का मूल्यांकन करके उचित जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
English Explanation: One should evaluate forts, kingdoms, and hidden vulnerabilities to gather precise intelligence.

०१.१६.१० – पर-अधिष्ठान अनुज्ञातः

पर-अधिष्ठानं अनुज्ञातः प्रविशेत्।।
हिंदी व्याख्या: किसी दूसरे के अधिष्ठान या क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अनुमति प्राप्त होनी चाहिए।
English Explanation: Entry into another's domain should only occur with explicit authorization.

०१.१६.११ – शासनं यथा-उक्तं

शासनं च यथा-उक्तं ब्रूयात्। प्राण-आबाधेअपि दृष्टे।।
हिंदी व्याख्या: शासन के नियमों का पालन करना चाहिए, भले ही जीवन पर खतरा हो।
English Explanation: The governance rules should be applied even in life-threatening situations.

०१.१६.१२ – वाचि वाक्य-पूजन

परस्य वाचि वक्त्रे दृष्ट्यां च प्रसादं वाक्य-पूजनं इष्ट-परिप्रश्नं गुण-कथा-सङ्गं आसन्नं आसनं सत्कारं इष्टेषु स्मरणं विश्वास-गमनं च लक्षयेत्तुष्टस्य। विपरीतं अतुष्टस्य।।
हिंदी व्याख्या: राजा या मंत्री को दूसरों के शब्दों, दृष्टि और व्यवहार से प्रसन्न और अप्रसन्न होने का ज्ञान रखना चाहिए। तुष्ट व्यक्तियों का सम्मान और विश्वास बढ़ाना चाहिए, और अतुष्टों का नियंत्रण करना चाहिए।
English Explanation: One must observe speech, demeanor, and actions to gauge satisfaction or dissatisfaction, honoring the pleased and controlling the displeased.

०१.१६.१३ – दूत-मुखा

तं ब्रूयात् "दूत-मुखा हि राजानः। त्वं चान्ये च।।
हिंदी व्याख्या: राजा या मंत्री को दूत और उनके मुखों से सही संदेश लेना चाहिए और दूसरों के माध्यम से भी सूचना प्राप्त करनी चाहिए।
English Explanation: One should receive correct information through envoys and other channels.

०१.१६.१४ – शस्त्रेषु वक्तारो

तस्मादुद्यतेष्वपि शस्त्रेषु यथा-उक्तं वक्तारो दूताः।।
हिंदी व्याख्या: युद्ध या संकट की स्थिति में दूत और संदेशवाहक को शस्त्रयुक्त क्षेत्र में भी भेजा जा सकता है, जैसा कि नियम बताए गए हैं।
English Explanation: Envoys may be sent into armed zones during conflict as prescribed.

०१.१६.१५ – अन्त-अवसायिनो अप्यवध्याः

तेषां अन्त-अवसायिनोअप्यवध्याः। किं अङ्ग पुनर्ब्राह्मणाः।।
हिंदी व्याख्या: अंतिम निर्णय पर पहुँचे लोगों को भी रोकना नहीं चाहिए; ब्राह्मणों की तरह उनका आदर करना आवश्यक है।
English Explanation: Even those who have reached final resolution should not be hindered; they should be respected like Brahmins.

०१.१६.१६ – परस्य वाक्य

परस्यएतद्वाक्यं।।
हिंदी व्याख्या: यह दूसरों का कथन है, जिसे ध्यानपूर्वक समझना चाहिए।
English Explanation: This refers to the statement of others, which must be carefully observed.

०१.१६.१७ – दूत-धर्म

एष दूत-धर्मः" इति।।
हिंदी व्याख्या: यह दूत का कर्तव्य है, जैसा कि नियमों और नैतिकता में निर्दिष्ट है।
English Explanation: This is the duty of the envoy as prescribed by ethical norms.

०१.१६.१८ – वसेदविसृष्टः पूजया

वसेदविसृष्टः पूजया नौत्सिक्तः।।
हिंदी व्याख्या: जिसे वश में रखा गया है, उसे सम्मान और पूजा के साथ रखना चाहिए, अवमानित नहीं करना चाहिए।
English Explanation: One under control should be treated with respect and reverence, not insulted.

०१.१६.१९ – परेषु बलित्वं न मन्येत

परेषु बलित्वं न मन्येत।।
हिंदी व्याख्या: दूसरों के बल और शक्ति को अधिक महत्व नहीं देना चाहिए।
English Explanation: One should not overvalue the strength or power of others.

०१.१६.२० – वाक्यं अनिष्टं सहेत

वाक्यं अनिष्टं सहेत।।
हिंदी व्याख्या: बुरे और अनिष्ट वाक्यों को सहन करना चाहिए।
English Explanation: Adverse or harmful words should be endured patiently.

०१.१६.२१ – स्त्रियः पानं च वर्जयेत्

स्त्रियः पानं च वर्जयेत्।।
हिंदी व्याख्या: स्त्रियों और मद्यपान से परहेज़ करना चाहिए।
English Explanation: Avoid indulgence in women and alcohol.

०१.१६.२२ – एकः शयीत

एकः शयीत।।
हिंदी व्याख्या: एक व्यक्ति अकेले विश्राम करे; एकाग्रता और संयम बनाए रखना चाहिए।
English Explanation: One should rest alone, maintaining focus and self-discipline.

०१.१६.२३ – सुप्त-मत्तयोर्हि भाव-ज्ञानं दृष्टं

सुप्त-मत्तयोर्हि भाव-ज्ञानं दृष्टं।।
हिंदी व्याख्या: नींद में या मत्तावस्था में भी किसी की भावनाओं और मनोवृत्ति का ज्ञान प्राप्त होता है।
English Explanation: Even in sleep or intoxication, the understanding of one's sentiments and dispositions can be observed.

०१.१६.२४ – कृत्य-पक्ष-उपजापं

कृत्य-पक्ष-उपजापं अकृत्य-पक्षे गूढ-प्रणिधानं राग-अपरागौ भर्तरि रन्ध्रं च प्रकृतीनां तापस-वैदेहक-व्यञ्जनाभ्यां उपलभेत। तयोरन्तेवासिभिश्चिकित्सक-पाषण्ड-व्यञ्जन-उभय-वेतनैर्वा।।
हिंदी व्याख्या: जब कर्तव्य पक्ष सक्रिय हो, तो उस समय अकृत्य पक्ष में गुप्त प्रयोजन और इच्छाएँ राग-अपराग के रूप में प्रकट होती हैं। यह तपस्वी, वैदेहक या अन्य प्रकार के व्यक्ति अपने गुणों के अनुसार अनुभव किए जाते हैं, चाहे वे अपने वेतन के अनुसार हों या न हों।
English Explanation: When the active party performs duty, the dormant party’s hidden intentions, attachment or detachment, are perceived through their nature, be it of ascetics or householders, and may relate to their rewards or positions.

०१.१६.२५ – असम्भाषा में प्राप्ति

तेषां असम्भाषायां याचक-मत्त-उन्मत्त-सुप्त-प्रलापैः पुण्य-स्थान-देव-गृह-चित्र-लेख्य-संज्ञाभिर्वा चारं उपलभेत।।
हिंदी व्याख्या: उनके मौन, अशांत, मत्त, या नींद में बोले गए शब्दों, साथ ही पुण्य स्थानों, देवालयों, चित्रों और लिखित संज्ञाओं से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
English Explanation: Knowledge about them can be inferred from their silence, delirium, intoxicated speech, sleep-talk, and from sacred places, temples, pictures, and written symbols.

०१.१६.२६ – उपलब्धस्य उपजाप

उपलब्धस्यौपजापं उपेयात्।।
हिंदी व्याख्या: उपलब्ध पक्ष के कार्य या उद्देश्यों के अनुसार उपयुक्त उपाय अपनाया जाना चाहिए।
English Explanation: Appropriate actions should be undertaken based on the active or accessible party's conduct.

०१.१६.२७ – प्रमाण की अनदेखी

परेण चौक्तः स्वासां प्रकृतीनां प्रमाणं नऽचक्षीत।।
हिंदी व्याख्या: दूसरों के व्यक्तित्व और प्रवृत्ति का प्रमाण दृष्टिगोचर नहीं होता, इसलिए उसे सीधे नहीं देखा जा सकता।
English Explanation: The evidence of another's nature is not directly visible and cannot be observed plainly.

०१.१६.२८ – सर्वं वेद

"सर्वं वेद भवान्" इति ब्रूयात्। कार्य-सिद्धि-करं वा।।
हिंदी व्याख्या: यह कहा जाता है कि "आप सब कुछ जानते हैं", और यह ज्ञान कार्य की सिद्धि और परिणाम में सहायक होता है।
English Explanation: It is stated, “You know everything,” which aids in achieving success in action.

०१.१६.२९ – कार्यस्यासिद्धावुपरुध्यमानस्तर्क

कार्यस्यासिद्धावुपरुध्यमानस्तर्कयेत् "किं भर्तुर्मे व्यसनं आसन्नं पश्यन्। स्वं वा व्यसनं प्रतिकर्तु-कामः। पार्ष्णि-ग्राहं आसारं अन्तः-कोपं आटविकं वा समुत्थापयितु-कामः। मित्रं आक्रन्दं वा व्याघातयितु-कामः। स्वं वा परतो विग्रहं अन्तः-कोपं आटविकं वा प्रतिकर्तु-कामः। संसिद्धं वा मे भर्तुर्यात्रा-कालं अभिहन्तु-कामः।।
हिंदी व्याख्या: जब कार्य असिद्ध या विफल होता है, तब मनुष्य को तर्क करना चाहिए – क्या उसे व्यसन, आंतरिक क्रोध या मित्रों को चोट पहुँचाने की इच्छा है, या अपने या दूसरों के बीच संघर्ष करना चाहिए।
English Explanation: When an action is not yet accomplished, one should deliberate whether to confront personal vices, internal anger, or conflicts with others, or allow the journey to continue safely.

०१.१६.३० – युद्ध और बल-संग्रह

सस्य-पण्य-कुप्य-संग्रहं दुर्ग-कर्म बल-समुद्दानं वा कर्तु-कामः। स्व-सैन्यानां वा व्यायामस्य देश-कालावाकाङ्क्षमाणः। परिभव-प्रमादाभ्यां वा। संसर्ग-अनुबन्ध-अर्थी वा। मां उपरुणद्धि" इति ज्ञात्वा वसेदपसरेद्वा।।
हिंदी व्याख्या: यह विचार कि सस्य, वस्तु-संग्रह, दुर्ग निर्माण, या सैनिक व्यायाम करना उचित है या नहीं। इसके लिए समय, स्थान, अवसर और संभावित असफलताओं को ध्यान में रखा जाता है।
English Explanation: One should consider whether to undertake activities like crop gathering, fort-building, or troop exercises, evaluating time, place, opportunity, and potential risks.

०१.१६.३१ – प्रयोजन की समीक्षा

प्रयोजनं इष्टं अवेक्षेत वा।।
हिंदी व्याख्या: मनुष्य को यह देखना चाहिए कि उद्देश्य वांछित है या नहीं।
English Explanation: One should assess whether the intended purpose is desirable or necessary.

०१.१६.३२ – शासन और भय

शासनं अनिष्टं उक्त्वा बन्ध-वध-भयादविसृष्टोअप्यपगच्छेत्। अन्यथा नियम्येत।।
हिंदी व्याख्या: यदि शासन या स्थिति हानिकारक है, तो बन्धन, वध या भय के कारण उससे अलग हट जाना चाहिए; अन्यथा नियमपूर्वक कार्य करना चाहिए।
English Explanation: If governance or circumstances are harmful, one should withdraw to avoid danger or oppression; otherwise, act according to established rules.

०१.१६.३३ – प्रेषण और उपजाप

प्रेषणं संधि-पालत्वं प्रतापो मित्र-संग्रहः।
उपजापः सुहृद्-भेदो गूढ-दण्ड-अतिसारणं।।
हिंदी व्याख्या: प्रेषण से संधि की रक्षा, शक्ति और मित्र-संग्रह संभव होता है। उपजाप से मित्रों में भेद, गुप्त दण्ड और आवश्यक क्रियाएँ संचालित होती हैं।
English Explanation: Dispatching envoys secures treaties, prestige, and alliances. Secret missions create distinctions among friends, enforce hidden punishments, and execute essential actions.

०१.१६.३४ – बन्धु-रत्न और समाधि

बन्धु-रत्न-अपहरणं चार-ज्ञानं पराक्रमः।
समाधि-मोक्षो दूतस्य कर्म योगस्य चऽश्रयः।।
हिंदी व्याख्या: बन्धु या मूल्यवान वस्तु का अपहरण, चारों प्रकार के ज्ञान और पराक्रम की योजना। दूत के कर्म और योग का उद्देश्य समाधि और मोक्ष में सहायक होता है।
English Explanation: Planning abduction of relatives or valuables, utilizing all four types of knowledge and valor. A messenger’s actions and skillful deployment serve the purpose of liberation and resolution.

०१.१६.३५ – दूतों की सुरक्षा

स्व-दूतैः कारयेदेतत्पर-दूतांश्च रक्षयेत्।
प्रतिदूत-अपसर्पाभ्यां दृश्य-अदृश्यैश्च रक्षिभिः।।
हिंदी व्याख्या: अपने दूतों द्वारा कार्य कराएँ और पर-दूतों की रक्षा करें। विरोधी दूतों से छिपकर या प्रकट होकर सुरक्षा सुनिश्चित करें।
English Explanation: Execute tasks through your own envoys and protect the envoys of allies. Ensure security against opposing envoys through visible or covert measures.

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