हरड़ (हरीतकी): आयुर्वेद की संजीवनी और इसके वैज्ञानिक फायदे

हरड़ (हरीतकी) के फायदे और आयुर्वेदिक चिकित्सा विज्ञान | Haritaki Benefits

हरड़ (हरीतकी): आयुर्वेद की संजीवनी और इसके वैज्ञानिक फायदे

आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान में हरड़ (हरीतकी) को 'विजया' और 'अमृता' कहा गया है। इसे सभी औषधियों में प्रधान माना जाता है क्योंकि यह मानव शरीर के तीनों दोषों (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करने की क्षमता रखती है। भावप्रकाश निघंटु जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में तो हरड़ को माँ के समान हितकारी माना गया है।


1. शास्त्रीय प्रमाण (आयुर्वेदिक श्लोक)

भावप्रकाश निघंटु के पूर्वखण्ड में हरीतकी की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा गया है:

यस्य माता गृहे नास्ति, तस्य माता हरीतकी ।
कदाचित् कुप्यते माता, नोदरस्था हरीतकी ॥
अर्थ: जिस मनुष्य की माता घर में नहीं होती, उसकी माता हरीतकी (हरड़) है। माता तो कभी-कभी (संतान पर) क्रोधित भी हो सकती है, लेकिन पेट में गई हुई हरड़ कभी भी मनुष्य का अहित (बुरा) नहीं करती, बल्कि माता की तरह रक्षा ही करती है।

इसके त्रिदोष नाशक और पाचक गुणों के विषय में आचार्य चरक ने 'चरक संहिता' में इसे 'वयःस्थापन' (उम्र के असर को कम करने वाली) औषधियों में सर्वश्रेष्ठ माना है।


2. हरड़ के औषधीय और वैज्ञानिक फायदे

• पाचन तंत्र एवं कब्ज में अचूक (Digestive Health)

हरड़ में प्रकृतिक रूप से हल्के रेचक (Laxative) गुण होते हैं। यह आंतों की गति (Peristalsis movement) को सुधारती है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार, हरड़ का सेवन पेट के अल्सर को ठीक करने और गैस्ट्रिक एसिड को नियंत्रित करने में सहायक है।

• एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एजिंग (Anti-Aging)

हरड़ में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, गैलिक एसिड (Gallic Acid) और एलाजिक एसिड जैसे पावरफुल पॉलीफेनोल्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर के फ्री रेडिकल्स को खत्म कर कोशिकाओं को बूढ़ा होने से बचाते हैं।

• वजन नियंत्रण (Metabolism Boost)

यह शरीर के 'अग्नि' (Metabolism) को तीव्र करती है। यह पाचन को दुरुस्त कर आंतों में जमे हुए विषाक्त पदार्थों (आम दोष) को बाहर निकालती है, जिससे अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद मिलती है।

• ओरल हेल्थ और घाव भरना (Antimicrobial)

हरड़ में मजबूत एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। इसके काढ़े से कुल्ला करने पर मसूड़ों की सूजन, पायरिया और मुँह के छाले ठीक होते हैं। इसके साथ ही यह घावों को जल्दी भरने में मदद करती है।


3. 'ऋतु हरीतकी' - आयुर्वेद का रसायन विज्ञान

आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान की यह सबसे बड़ी विशेषता है कि मौसम (ऋतु) के अनुसार हरड़ को अलग-अलग चीजों (अनुपान) के साथ लेने की सलाह दी गई है, ताकि शरीर को अधिकतम लाभ मिल सके। इसे 'ऋतु हरीतकी' कहा जाता है:

ऋतु (Season) महीने (लगभग) किसके साथ लें (अनुपान)
वर्षा (Monsoon) जुलाई - अगस्त सेंधा नमक (Saindhava Lavana) के साथ
शरद (Autumn) सितंबर - अक्टूबर मिश्री या शक्कर के साथ
हेमंत (Early Winter) नवंबर - दिसंबर सोंठ (Dry Ginger) के साथ
शिशिर (Late Winter) जनवरी - फरवरी पिप्पली (Long Pepper) के साथ
वसंत (Spring) मार्च - अप्रैल शहद (Honey) के साथ
ग्रीष्म (Summer) मई - जून गुड़ (Jaggery) के साथ

4. वैज्ञानिक वर्गीकरण और रासायनिक घटक

  • वानस्पतिक नाम (Botanical Name): Terminalia chebula
  • कुल (Family): Combretaceae
  • मुख्य सक्रिय तत्व: चेबुलिनिक एसिड (Chebulinic acid), टैनिन (Tannins), गैलिक एसिड और फ्लेवोनोइड्स। ये तत्व इसे एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला) बनाते हैं।

5. सावधानियाँ (Contraindications)

हालाँकि हरड़ अत्यंत सुरक्षित है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार निम्नलिखित अवस्थाओं में इसका सेवन नहीं करना चाहिए या योग्य वैद्य की सलाह लेनी चाहिए:

  • गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए (क्योंकि यह संकुचन पैदा कर सकती है)।
  • अत्यधिक कमजोरी, थकान या उपवास (Fasting) के दौरान इसका सेवन वर्जित है।
  • जिनका शरीर अत्यधिक रूखा (Dehydrated) हो, उन्हें इसका सीधे सेवन करने से बचना चाहिए।

 हरड के फायदे,,,,


1.नमक के साथ हरड़ खाने से पेट सदा साफ रहता है। हरड़ के चूर्ण में एक चौथाई भाग ही नमक मिलाना चाहिए इससे अधिक में दस्तावर हो सकता है।

2.घी के साथ हरड़ का चूर्ण चाटने से कभी हृदय रोग नहीं होता।

3.सुबह शहद के साथ हरड़ का चूर्ण चाटने से शरीर का बल और शक्ति बढ़ती है।

4.मक्खन-मिस्री के साथ हरड़ के चूर्ण का सेवन करने से स्मरण शक्ति और बुद्धि बढ़ती है अतः विद्यार्थियों का इसका सेवन अवश्य करना चाहिए।

5.पंचगव्य के साथ हरड़ का चूर्ण सेवन करने से आयु बढ़ती है।

6.इसके सेवन से कई छोटी से बड़ी बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है, यह दिमाग को तेज रखने में और आँखों के लिए सबसे गुणकारी औषधि है, जो शरीर को ताकत प्रदान कर निरोगी बनाती है। सिर्फ यही नहीं यह हमारे शरीर को कब्ज से छुटकारा दिलवाने में भी मददगार साबित हुई है। तो आज से ही इसका सेवन शुरू करे, इसका चूर्ण और गोलियां आसानी से मार्केट में मिल जाती है।

7.हरड़ के एनिमा से अल्सेरिक कोलाइटिस जैसे रोग भी ठीक हो जाते हैं। इन सभी रोगों के उपचार के लिए हरड़ के चूर्ण की तीन से चार ग्राम मात्रा का दिन में दो-तीन बार सेवन जरूर करना चाहिए। कब्ज के इलाज के लिए हरड़ को पीसकर पाउडर बनाकर या घी में सेकी हुई हरड़ की डेढ़ से तीन ग्राम मात्रा में शहद या सैंधे नमक में मिलाकर देना चाहिए।

8.हरड़ लीवर, स्पलीन बढ़ने तथा उदरस्थ कृमि जैसे रोगों के इलाज के लिए लगभग दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना ही चाहिए। हरड़ हमारे लिए बहुत उपयोगी है परन्तु फिर भी कमजोर शरीर वाले व्यक्ति, अवसादग्रस्त व्यक्ति या फिर गर्भवती स्त्रियों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

9.नेत्र रोगो से मुक्ति : हरड़ नेत्र के लिए सबसे फायदेमंद होती है, इसका सेवन करने के लिए पहले हरड़ को भुनले, फिर बारीक़ पीस लेने के बाद इसका अच्छी तरह से लेप बनाकर के आँखों के चारो और लगा ले। ऐसा करने से आँखों की सूजन और जलन जैसी परेशानिया दूर होती है।

10.कब्ज के लिए : बवासीर और कब्ज के लिए हरड़ का चूर्ण बहुत ही लाभकारी होता है। इसके लिए हरड़ में थोड़ा सा गुड मिलाकर गोली बना ले, छाछ में भुना हुआ जीरा मिलाकर ताजी छाछ के साथ सुबह शाम लेने से बवासीर के मस्सों का दर्द और सूजन कम होने लगती है।

11.नवजात शिशु के लिए : अगर नवजात शिशु के भौहें नहीं हो, तो उन्हें हरड़ को लोहे पे घिसकर, सरसो के तेल के साथ मिलाकर शिशु के भौहें पर लगाये और धीरे-धीरे मालिश करते रहने से वह उगने लगते है। इसके साथ ही एक सप्ताह तक बच्चो को हरड़ पीसकर खिलाये जाने से उससे कब्ज की शिकायत नहीं होगी।

12.दमा में राहत : यदि जिन लोगो को दमे की परेशानी है, तो वो रात के समय में हरड़ को चूसे या आवलें के रस में हरड़ मिलाकर सेवन करने से भी इस बीमारी से राहत मिलती है।

13.अपच की शिकायत : हरड़ का सेवन पाचन क्रिया को सही रखने में असरदारी होता है, इसके लिए खाना खाने से पहले हरड़ के चूर्ण में सोंठ का चूर्ण मिलाकर साथ लेने से भूक आसानी से खुल जाती है, और भूक लगने लगती है। इसके साथ ही सोंठ, गुड़ या सेंधा नमक मिलाकर खाने से भी पाचन सही रहता है।

14.चक्कर आना : अगर आपको अचानक चक्कर आने की शिकायत है, तो पीपल (जिसे गरम मसाले मे मिलाते है), सौंठ यानि सुखी अदरक, सौंफ और हरड़ 25-25 ग्राम लेले। अब 150 ग्राम गुड में इन सभी को मिलाकर गोल आकार की गोली बनाए। 1-2 गोली दिन मे 3 बार लेने से चक्कर आना, सिर घूमना बंद हो जाएगा।

15.हरड़ का सेवन लगातार करने से शरीर में थकान महसूस नहीं होती और स्फूर्ति बनी रहती है।

16.हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है।

17.हरड़ के सेवन से खांसी व कब्ज जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।

18.हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आना बंद हो जाती है।अगर शरीर में कही भी घाव हो जांए तो हरड़ से उस घाव को भर लेना चाहिए।

19.एक चम्मच हरड़ के चूर्ण में दो किशमिश के साथ लेने से एसिडिटी ठीक हो जाती है।

20.हिचकी आने पर हरड़ पाउडर व अंजीर के पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लेने से लाभ होता है।

21.छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें। रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस की समस्या कम हो जाती है।

22.हरड़ को भून कर खूब बारीक पीस लें और लेप बना कर आंखों के चारो ओर लगाएं। इससे हर प्रकार के नेत्र रोग ठीक हो जाते हैं।

23.हरड़ का काढ़ा त्वचा संबंधी एलर्जी में लाभकारी है।

24.हरड़ के फल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और इसका सेवन दिन में दो बार नियमित रूप से करने पर जल्द आराम मिलता है।

25.एलर्जी से प्रभावित भाग की धुलाई भी इस काढ़े से की जा सकती है।

26.फंगल एलर्जी या संक्रमण होने पर हरड़ के फल और हल्दी से तैयार लेप प्रभावित भाग पर दिन में दो बार लगाएं, त्वचा के पूरी तरह सामान्य होने तक इस लेप का इस्तेमाल जारी रखें।

27.मुंह में सूजन होने पर हरड़ के गरारे करने से फायदा मिलता है।

28.हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ मिलाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।

29.हरड़ का चूर्ण दुखते दांत पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है।

30.हरड़ स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक होता है जिसके प्रयोग से बाल काले, चमकीले और आकर्षक दिखते हैं।

31.हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर (हरड़ पूरी तरह घुलने तक) लेप बनाएं और इसे बालों में लगाएं या फिर प्रतिदिन 3-5 ग्राम हरड़ पावडर एक गिलास पानी के साथ सेवन करें।

32.हरड़ का पल्प कब्ज से राहत दिलाने में भी गुणकारी होता है। इस पल्प को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ इसका सेवन करें।

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